BY-PARVEEN KAUSHIK
चंद्रावल फेम हरियाणवी लोक कलाकार मनफूल सिंह डांगी का निधन
चंद्रावल फेम हरियाणवी लोक कलाकार मनफूल सिंह डांगी का निधन
राजपुर गांव में किया गया अंतिम संस्कार
आकाशवाणी, दूरदर्शन और मंच के जाने-माने कलाकार थे डांगी
जुलाई 1959 को मोतीलाल नेहरू स्पोटर्स स्कूल राई के उद्घाटन पर पंडित जवाहरलाल नेहरू का स्वागत गीत प्रस्तुत कर की थी शुरूआत
रणबीर रोहिल्ला,
सोनीपत।
हरियाणवी रंगमंच के प्रमुख स्तंभ और प्रसिद्ध लोक कलाकार मनफूल सिंह डांगी का रविवार रात को निधन हो गया। 78 वर्षीय डांगी ने प्रसिद्ध हरियाणवी फिल्म चंद्रावल की प्रमुख अभिनेत्री चंद्रावल के पिता का अभिनय किया था और वह इस फिल्म के गीतकार और नृत्य निर्देशक भी थे। सोमवार सुबह उनके गांव राजपुर में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
15 मार्च 1939 को राजपुर गांव में जन्मे मनफूल सिंह दांगी ने सबसे पहले 4 जुलाई 1959 को मोतीलाल नेहरू स्पोटर्स स्कूल राई के उद्घाटन के लिए पहुंचे पंडित जवाहरलाल नेहरू के स्वागत में गीत गाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। गीत के बोल थे (जन्म-जन्म की आशा पूरी होगी खुशी मना कै। हारा रोम-रोम पुलकित हो रैया सै तेरे तिलक लगाकै)।। इस गीत से प्रभावित होकर तत्कालीन डीपीआरओ रोहतक ने उन्हें नाटक मंडली में बतौर कलाकार नियुक्ति दी थी। इसके बाद वह लोक संपर्क विभाग में 32 वर्ष कलाकार और फिर स्टेज मास्टर, नाटक निरीक्षक और एफपीए के पदों पर 39 वर्ष सेवारत रहे। चंद्रावल फिल्म में उनके लिखे गीत ।गाडे आली गजबण छोरी) और (तू जंगल की मोरणी मैं छौरा जाट का) आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
हरियाणवी फिल्मों के सुपरस्टार थे डांगी
मनफूल सिंह डांगी हरियाणवी फिल्मों के स्टार थे। पिछले 50 वर्षों में जितनी भी हरियाणवी फिल्में आई उनमें उन्हें अभिनय, संगीतकार, कहानीकार, गीतकार और स्क्रीन प्ले लेखक के तौर पर भूमिका निभाई। हरियाणवी गोल्डन जुबली फिल्म चंद्रवाल के गीतकार, नृत्य निदेशक और चंद्रावल के बाप की भूमिका निभाई। हरियाणवी फिल्म लीलो चमन, चंद्रो, चंद्रकांता फिल्मों में काम किया और गीतकार व स्क्रीन प्ले लिखे। आकाशवाणी रोहतक से इन्हीं फिल्मों के हरियाणवी गीत फरमाईशी कार्यक्रम में एक गीत हरियाणवी फिल्मों से आज भी प्रसारित हो रहे हैं। हरियाणवी लोकनृत्य पर गाए जाने वाले 150 लोकगीतों का संग्रह उन्होंने किया है। प्रदेश में अलग-अलग अवसर पर गाए जाने वाले सैकड़ों ब्याह-शादी, सामण, कार्तिक के गीतों का संग्रह भी उन्हीं की देन है। हरियाणवी कवि के तौर पर भी उनकी काफी याती रही है। घर की फूट, वाबला बटेऊ, बहू चाली, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी हरियाणवी सीडी उनके निर्देशन में ही तैयार हुई और खूब प्रसिद्धी मिली।
राजपथ पर हरियाणवी संस्कृति के ध्वजवाहक रहे हैं डांगी
मनफूल सिंह डांगी ने नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति से इंडिया गेट तक जाने वाली झांकी में बतौर डांसर 1968, 1969 व 1970 में हिस्सा लिया और भारत के तत्कालीन राष्ट्रपतियों से मैडल प्राप्त किया। लोक संपर्क विभाग द्वारा हरियाणवी लोकनृत्य में 1969-70 में 10 हजार रुपये का प्रथम पुरस्कार और इसके बाद दूसरा पुरस्कार जीता। एशियाड़ 1982 में 320 छात्राओं के दल द्वारा प्रस्तुत किए गए लोकगीत (मेरा दामण सीमा दे औ ननदी के बीरा) के ड्रांस ट्रेनर मनफूल सिंह दांगी ही थे। नॉन ओलंपिक गे स गोरखपुर में डांस कंपीटिशन में स्वर्ण पदक भी उन्होंने हासिल किया था। मुंबई के कोयना में भूकंप पीडि़तों के लिए उन्होंने सांस्कृतिक प्रस्तुती दी थी।
सीमा पर जवानों का हौसला बढ़ाने हमेशा जाते थे मनफूल
देश की सरहद पर देश की रक्षा कर रहे सेना के जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए मनफूल सिंह डांगी हमेशा जाते रहते थे। भारत-चीन व पाकिस्तान के चारों युद्धों 1962, 1965, 1971 व कारगिल युद्धों के समय जंगी गीत लिखे और गाए थी। 1963 में चीनी आक्रमण के समय लद्दाख के दुर्बुक, शक्ति व सूरतगढ़ में फौजी कैंपों में जाकर कार्यक्रम दिए।
1960 से लगातार दे रहे थे कार्यक्रम
मनफूल सिंह डांगी 1960 से लगातार आकाशवाणी केंद्र दिल्ली व आकाशवाणी केंद्र रोहतक बनने के बाद से रेडियो गायक के तौर पर हरियाणवी रागणी व लोकगीतों का कार्यक्रम दे रहे थे। दूरदर्शन दिल्ली, जालंधर व हिसार के केंद्रों से कई बार लोकनृत्य व गीत प्रस्तुत किए। हिंदी नाटक (ये पत्ते कब हरे होंगे) दिल्ली दूरदर्शन पर लगातार दिखाया जाता रहा है।
मुंबई में जाकर हरियाणवी गीतों की धूम मचाई
मनफूल सिंह डांगी की गायकी की धूम मुंबई तक रही है। पोलीडोर आफ इंडिया रिकार्डिंग कंपनी ने उनके गीतों की आडियो रिलिज की। इनमें (सजना मैं जांगी मेले मैं), (गोरी हारे गाम की, नजर लागी रंडुए की) बहुत प्रसिद्ध रही हैं। (सजना जांगी मेले मैं) ग्रामोफोन मशीन रिकार्ड आकाशवाणी दिल्ली से लगातार दस वर्ष तक फरमाईश कार्यक्रम में प्रसारित होता रहा। राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकार देवी शंकर प्रभाकर से कला व कल्चर की शिक्षा लेकर उन्होंने हरियाणवी फिल्मों में योगदान दिया।
नए कलाकारों को मंच पर लेकर आए
मनफूल सिंह डांगी प्रदेश के नए कलाकारों को भी खूब प्रोत्साहित करते थे। हरियाणा में बतौर घड़़वा गायक पहली बार महिला कलाकारों को स्टेज पर लेकर आए। इन घड़वा गायिकाओं में सरिता चौधरी, नीलम चौधरी, मीनाक्षी पांचाल ने बहुत प्रसिद्धी हासिल की। प्रसिद्ध निर्देशक विलायत जाफरी के ध्वनि एवं प्रकाश कार्यक्रम कल और आज की प्रस्तुती में पंडित ल मीचंद के गीतों के साथ उनका एक गीत (सारे भारत का प्यारा सै हारा हरियाणा) उन्होंने ही प्रस्तुत किया। लता मंगेशकर की बहन ऊषा मंगेशकर के साथ हरियाणवी फिल्म चंद्रो के गीत उनकी आवाज में रिकार्ड किए।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सिर पर पगड़ी बांध भेंट की थी टोकणी
1983 में गणतंत्र दिवस समारोह के समापन पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा दी गई चाय पार्टी में उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति डा. जाकिर हुसैन व तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सिर पर हरियाणा का प्रतीक चिन्ह पगड़ी बांधी थी। इसके अलावा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को टोकणी व छ मा (हरियाणवी ओढ़णा) भेंट किया था।
मनफूल सिंह डांगी के आखिरी शब्द
मैने अपने जीवन के बहुमूल्य 50 वर्ष हरियाणवी कला व संस्कृति के प्रचार व प्रसार हेतू लगाकर बहुत प्रसिद्धि हासिल की। इस कार्य ने मेरे मन और आत्मा को बहुत सुख व शांति प्रदान की। मैं चाहता हूं कि जब तक मैं जिंदा रहूं हरियाणवी कला व संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए समर्पित रहूं और मेरे जाने के बाद हरियाणवी कला व संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मेरी रचनाएं व कार्य मार्गदर्शन का काम करें।
No comments:
Post a Comment